Supreme Court CAQM: गर्मी में धूल और जाड़े में कार, कैसे दूर होगा दिल्ली का प्रदूषण? CAQM ने गिनाईं वजहें और समाधान

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Last Updated:January 22, 2026, 15:49 IST

Delhi Air Quality News: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने बड़ा रोडमैप पेश किया है. गर्मियों में उड़ती धूल और सर्दियों में गाड़ियों के धुएं से निपटने के लिए टोल व्यवस्था, पर्यावरण शुल्क, वाहनों पर सख्ती, सार्वजनिक परिवहन के विस्तार, उद्योगों की निगरानी और पराली नियंत्रण जैसे कई अहम सुझाव दिए गए हैं. आयोग का कहना है कि बिना समन्वित कार्रवाई के राजधानी की हवा साफ नहीं हो सकती.

गर्मी में धूल, जाड़े में कार, दिल्ली का प्रदूषण पर CAQM ने गिनाईं वजहें-समाधानदिल्ली के प्रदूषण को कैसे किया जा सकता है कम CAQM ने बताया समाधान

नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण अब सिर्फ सर्दियों की समस्या नहीं रह गई है. गर्मियों में उड़ती धूल और सर्दियों में गाड़ियों का धुआं राजधानी की हवा को साल भर जहरीला बनाए रखता है. इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक विस्तृत हलफनामा दाखिल कर बताया है कि दिल्ली का प्रदूषण कैसे कम किया जा सकता है. CAQM ने साफ कहा है कि अगर टोल व्यवस्था, गाड़ियों का प्रदूषण, उद्योगों की लापरवाही, कचरा, पराली और हरियाली इन सभी पर एक साथ काम नहीं हुआ, तो हालात नहीं सुधरेंगे.

दिल्ली बॉर्डर पर टोल और पर्यावरण शुल्क पर क्या कहा?
CAQM का कहना है कि दिल्ली में दाखिल होने वाले वाहनों से पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) की वसूली बिना रुकावट जारी रहनी चाहिए. इसके लिए दिल्ली नगर निगम को अक्टूबर 2026 तक सभी 126 टोल नाकों पर अत्याधुनिक सिस्टम लगाने का निर्देश दिया गया है. इसमें शामिल हैं…

– RFID
– ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान (ANPR)
– बिना बैरियर के मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल सिस्टम

अगर तय समय तक यह सिस्टम नहीं लगा, तो नवंबर से जनवरी के बीच सिर्फ 9 चिन्हित टोल प्लाजा पर ही उन्हीं वाहनों से टोल लिया जाए, जिन पर पर्यावरण शुल्क लागू होता है. बाकी वाहनों को अस्थायी राहत देने की बात कही गई है, ताकि जाम और प्रदूषण न बढ़े. CAQM ने यह भी कहा कि साल 2015 से नहीं बदली गई टोल और पर्यावरण शुल्क दरों की समीक्षा जरूरी है ताकि इनका डर और असर बना रहे. साथ ही, जो पैसा अब तक जमा होकर पड़ा है, उसका पूरा इस्तेमाल प्रदूषण रोकने में किया जाना चाहिए.

गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण पर सख्ती
CAQM ने साफ कहा है कि ज्यादा धुआं फैलाने वाली गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से दिल्ली-एनसीआर से हटाया जाएगा. ऐसी गाड़ियों को या तो स्क्रैप किया जाएगा या फिर क्षेत्र से बाहर भेजा जाएगा.

PUC 2.0 सिस्टम को मजबूत करना

– सड़क पर चलती गाड़ियों की रिमोट सेंसिंग से जांच – मेट्रो, लोकल ट्रेन और बस सेवाओं का बड़ा विस्तार – ज्यादा इलेक्ट्रिक और CNG बसें – आखिरी मील कनेक्टिविटी और रियल टाइम यात्री जानकारी – इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क का विस्तार और पुराने वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने की अनुमति देने की बात भी कही गई है. – CAQM ने यह भी सुझाव दिया है कि 2000 सीसी या उससे ज्यादा इंजन वाली डीजल लग्जरी कारों और SUV पर ज्यादा पर्यावरण शुल्क लगाया जाए, जो फिलहाल सिर्फ 1% है.

उद्योगों और निर्माण कार्य से उड़ती धूल पर लगाम
निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल को प्रदूषण का बड़ा कारण मानते हुए CAQM ने कहा है कि हर निर्माण स्थल का पंजीकरण अनिवार्य हो. कचरे का पूरा संग्रह और प्रोसेसिंग हो, सड़कों की मशीनीकृत सफाई हो और गड्ढों की समय पर मरम्मत हो. उद्योगों के लिए साझा बॉयलर, गैस पाइपलाइन, प्रदूषण फैलाने वाली भट्टियों को हटाने और 300 किलोमीटर के दायरे में कोई नया कोयला आधारित पावर प्लांट न लगाने की सिफारिश भी की गई है.

कचरा, पराली और हरियाली पर फोकस
CAQM ने कहा है कि लैंडफिल में पड़े पुराने कचरे को पूरी तरह खत्म करना होगा। इसके लिए कचरे का स्रोत पर ही अलग-अलग संग्रह, कचरा बीनने वालों को सिस्टम से जोड़ना, कचरा प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाना जरूरी है. पराली जलाने से निपटने के लिए मशीनों, बायोमास प्लांट और सैटेलाइट निगरानी पर जोर दिया गया है. साथ ही, NCR में पेड़ लगाने, ग्रीन बेल्ट और शहरी हरियाली बढ़ाने को भी प्रदूषण नियंत्रण का अहम हिस्सा बताया गया है.

हर साल जवाबदेही तय होगी
हलफनामे में बताया गया है कि CAQM अब NCR के सभी राज्यों, नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों से हर साल कार्ययोजना बनवाएगा, ताकि यह तय किया जा सके कि प्रदूषण रोकने के लिए कौन कितना जिम्मेदार है.

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First Published :

January 22, 2026, 15:49 IST

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