DRDO DURGA-II Project: ईरान वॉर ने एक बार फिर से यह सिद्ध कर दिया कि किसी भी देश के लिए अपने एयरस्पेस को सुरक्षित रखना कितना अहम और महत्वपूर्ण है. अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एयर अटैक कर पूरे देश को धुआं-धुआं कर दिया. ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर हमला बोला और व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचाया. इसके अलावा तेहरान ने अरब देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया और व्यापक पैमाने पर तबाही मचाई. यहां तक कि THAAD एयर डिफेंस सिस्टम के भी तबाह होने की सूचना सामने आई है. उधर, इजरायल का आयरन डोम भी ईरानी हमले के सामने पस्त होता नजर आया है. खासकार ईरान के सस्ते शाहेद ड्रोन ने अमेरिका और इजरायल को काफी नुकसान पहुंचाया है. ऐसे में अब THAAD और आयरन डोम की क्षमताओं पर प्रश्नचिह्न सा लग गया है. इन सब डेवलपमेंट के बीच भारत ने अल्ट्रा मॉडर्न एयर डिफेंस सिस्टम डेवलप करने में जुट गया है. भारत का लक्ष्य सस्ते ड्रोन अटैक से उससे भी कम लागत में निपटा जा सके. फर्ज कीजिए कि दुश्मन की ओर से ड्रोन अटैक किया गया और उससे निपटने में यदि S-400 या आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम को तैनात किया जाएगा तो यह काफी महंगा साबित होगा. ऑपरेशन सिंदूर से सीख लेते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अब मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम डेवलप किया जा सके जो खासतौर पर स्वैर्म ड्रोन अटैक (ड्रोन का झुंड) से काफी सस्ते में निपट सके. DRDO इसके लिए डायरेक्टेड एनर्जी वेपन सिस्टम बना रहा है. यह किसी भी तरह के ड्रोन अटैक से निपटने में सक्षम होगा.
आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप में सस्ते ड्रोन और स्वैर्म अटैक सबसे बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं. इसी चुनौती से निपटने के लिए भारत तेजी से लेजर आधारित हथियारों के विकास पर काम कर रहा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी Defence Research and Development Organisation (DRDO) द्वारा विकसित किए जा रहे डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) सिस्टम को भारत की भविष्य की हवाई सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जा रहा है. इनमें खास तौर पर DURGA-II और Mk-II(A) जैसे लेजर वेपन शामिल हैं, जो ड्रोन और अन्य कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों (Aerial Threat) को बेहद कम लागत में नष्ट करने की क्षमता रखते हैं. दरअसल, पारंपरिक हवाई सुरक्षा प्रणाली (Conventional Air Defence System) में दुश्मन के ड्रोन या मिसाइल को मार गिराने के लिए महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाता है. उदाहरण के तौर पर Tamir interceptor जैसे इंटरसेप्टर की एक फायरिंग पर हजारों डॉलर का खर्च आ सकता है. जबकि आज के दौर में इस्तेमाल होने वाले कई ड्रोन की कीमत इससे कहीं कम होती है. ऐसे में हमलावर के मुकाबले रक्षात्मक पक्ष को ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.
चीन लेजर वेपन बेस्ड एयर डिफेंस सिस्टम डेवलप किया है. इससे कम लागत में सस्ते ड्रोन अटैक से निपटना संभव है. (फाइल फोटो/Reuters)
लेजर बेस्ड एयर डिफेंस सिस्टम
‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, इसी असंतुलन को खत्म करने के लिए लेजर आधारित एयर डिफेंस को भविष्य का समाधान माना जा रहा है. मिसाइलों के विपरीत लेजर हथियार किसी फिजिकल प्रोजेक्टाइल का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि इलेक्ट्रिक एनर्जी से पैदा होने वाली अत्यधिक केंद्रित ऊर्जा किरण (concentrated beams of energy) से लक्ष्य को नष्ट करते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सेकंड तक लेजर फायर करने की लागत महज कुछ लीटर ईंधन के बराबर होती है. यही कारण है कि इसे लगभग शून्य लागत प्रति शॉट वाली तकनीक कहा जा रहा है. लेजर हथियारों की एक और बड़ी खासियत यह है कि इनमें गोला-बारूद की पारंपरिक सीमा नहीं होती. मिसाइल बैटरी में जितने इंटरसेप्टर मौजूद होते हैं, वही अधिकतम फायरिंग की सीमा होती है, लेकिन लेजर सिस्टम तब तक काम कर सकता है, जब तक उसके पास बिजली की आपूर्ति उपलब्ध हो. इस वजह से बड़ी संख्या में आने वाले ड्रोन हमलों को रोकने में यह तकनीक बेहद उपयोगी मानी जा रही है.
DURGA-II: भारत का ब्रह्मास्त्र
भारत के लेजर हथियार कार्यक्रम का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट DURGA-II यानी Directionally Unrestricted Ray-Gun Array है. इसे DRDO द्वारा विकसित किया जा रहा है और इसमें 100 किलोवाट से अधिक शक्ति वाला हाई-एनर्जी लेजर इस्तेमाल किए जाने की संभावना है. इस श्रेणी के लेज़र को भारी डायरेक्टेड एनर्जी वेपन माना जाता है, जो कई तरह के हवाई खतरों को निशाना बना सकता है. सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षमता वाला लेजर सिस्टम आने वाले समय में दुश्मन के ड्रोन, क्रूज मिसाइल, हेलीकॉप्टर और यहां तक कि विमान के सेंसर या बाहरी उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाने में सक्षम हो सकता है. यह तकनीक लक्ष्य के किसी एक प्वाइंट पर एनर्जी को केंद्रित करती है, जिससे उस हिस्से का तापमान तेजी से बढ़ता है और संरचनात्मक हिस्से या इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम नष्ट हो जाते हैं.
एयर-डिफेंस लेजर वेपन क्या होते हैं?
एयर-डिफेंस लेजर वेपन ऐसे निर्देशित ऊर्जा हथियार (Directed Energy Weapons) होते हैं जो अत्यधिक शक्तिशाली लेजर बीम का इस्तेमाल करके दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल या छोटे हवाई लक्ष्यों को नष्ट करते हैं. यह हथियार प्रकाश की तेज ऊर्जा को लक्ष्य पर केंद्रित करते हैं, जिससे उसका ढांचा गर्म होकर क्षतिग्रस्त हो जाता है. इन्हें भविष्य की आधुनिक वायु-रक्षा तकनीक माना जा रहा है.
ये हथियार काम कैसे करते हैं?
लेजर हथियार पहले रडार या सेंसर की मदद से लक्ष्य को पहचानते और ट्रैक करते हैं. इसके बाद सिस्टम एक अत्यधिक केंद्रित लेजर बीम लक्ष्य पर छोड़ता है. यह बीम कुछ सेकंड तक एक ही बिंदु पर ऊर्जा केंद्रित करती है, जिससे लक्ष्य का धातु या इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पिघल या जल सकता है और वह नष्ट हो जाता है.
एयर-डिफेंस में लेजर हथियारों का इस्तेमाल क्यों बढ़ रहा है?
हाल के वर्षों में ड्रोन और स्वैर्म ड्रोन (Drone Swarms) का खतरा तेजी से बढ़ा है. पारंपरिक मिसाइल सिस्टम हर छोटे ड्रोन को गिराने में महंगे पड़ते हैं. लेजर हथियार अपेक्षाकृत कम लागत में लगातार कई लक्ष्यों को नष्ट कर सकते हैं, इसलिए इन्हें आधुनिक युद्ध में प्रभावी समाधान माना जा रहा है.
इन हथियारों की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
लेजर हथियार बेहद तेज गति से काम करते हैं, क्योंकि प्रकाश की गति से लक्ष्य तक पहुंचते हैं. इनमें गोला-बारूद की जरूरत नहीं होती और एक बार सिस्टम सक्रिय होने के बाद कई बार फायर किया जा सकता है. इसके अलावा प्रति शॉट लागत बहुत कम होती है, जो पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में बड़ा फायदा है.
क्या इनकी कोई सीमाएं भी हैं?
हालांकि लेजर हथियार उन्नत तकनीक हैं, लेकिन मौसम की स्थिति जैसे धुंध, धूल, बारिश या बादल इनके प्रभाव को कम कर सकते हैं. इसके अलावा बहुत लंबी दूरी के लक्ष्यों पर इनकी क्षमता सीमित हो सकती है. इसी वजह से इन्हें पारंपरिक मिसाइल और रडार सिस्टम के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने की योजना बनाई जाती है.
भारत इस तकनीक पर क्या काम कर रहा है?
भारत में Defence Research and Development Organisation (DRDO) निर्देशित ऊर्जा हथियारों पर तेजी से काम कर रहा है. इनका उद्देश्य भविष्य में ड्रोन, मिसाइल और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों से निपटने के लिए स्वदेशी लेज़र-आधारित एयर-डिफेंस सिस्टम विकसित करना है, जिससे देश की वायु सुरक्षा और मजबूत हो सके.
Mk-II(A): ड्रोन स्वैर्म का काल
जहां DURGA-II को रणनीतिक स्तर का हाई-पावर हथियार माना जा रहा है, वहीं DRDO छोटे और सामरिक स्तर के लेजर सिस्टम भी विकसित कर रहा है. इनमें Mk-II(A) डायरेक्टेड एनर्जी वेपन खास तौर पर ड्रोन रोधी अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है. लगभग 30 किलोवाट क्षमता वाला यह सिस्टम छोटे मानव रहित विमान (UAV), स्वैर्म ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हेलीकॉप्टरों को निशाना बनाने के लिए अनुकूलित है. अप्रैल 2025 में DRDO ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित ड्रोन टेस्ट रेंज पर एक लेजर आधारित हथियार प्रणाली का सफल परीक्षण किया था. इस परीक्षण के दौरान लेजर ने कई फिक्स्ड-विंग ड्रोन को ट्रैक कर उन्हें सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया. यह परीक्षण इस बात का प्रमाण माना गया कि भारत की लेज़र तकनीक वास्तविक परिस्थितियों में हवाई लक्ष्यों को पहचानने, लॉक करने और नष्ट करने में सक्षम है.
प्रकाश की गति से हमला
लेजर हथियारों का एक और महत्वपूर्ण लाभ उनकी प्रतिक्रिया गति है. मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने में कुछ सेकंड लग सकते हैं, लेकिन लेजर किरण लक्ष्य पर लगभग प्रकाश की गति से पहुंचती है. इसका मतलब है कि सिस्टम के लक्ष्य लॉक करते ही हमला लगभग तुरंत हो जाता है. यह विशेषता स्वार्म ड्रोन हमलों के खिलाफ बेहद अहम साबित हो सकती है, जहां एक साथ कई लक्ष्य बहुत कम समय में सामने आते हैं. इसके अलावा लेज़र सिस्टम अत्यधिक सटीक होते हैं, जिससे ऑपरेटर केवल लक्ष्य को निष्क्रिय कर सकता है और बड़े विस्फोट या मलबे के खतरे से बचा जा सकता है.
फ्यूचर एयर डिफेंस स्ट्रैटजी
दुनिया भर में सैन्य शक्तियां ड्रोन और कम लागत वाले हवाई हथियारों के बढ़ते खतरे को देखते हुए डायरेक्टेड एनर्जी तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रही हैं. भारत के लिए भी लेजर आधारित रक्षा प्रणाली का विकास एक रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि DURGA-II और Mk-II(A) जैसे सिस्टम सफलतापूर्वक ऑपरेशनल हो जाते हैं, तो वे भारत की बहुस्तरीय हवाई सुरक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा बन सकते हैं. ये सिस्टम पारंपरिक मिसाइल रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और रडार नेटवर्क के साथ मिलकर काम करेंगे और बड़ी संख्या में आने वाले हवाई खतरों से निपटने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे. इस तरह कम लागत, तेज रिएक्शन और लगभग असीमित फायरिंग क्षमता वाले लेज़र हथियार आने वाले समय में भारत की हवाई सुरक्षा रणनीति को पूरी तरह बदल सकते हैं.

1 hour ago
