नई दिल्ली (Republic Day 2026). हर साल 26 जनवरी को भारत पूरे जोश और गर्व के साथ गणतंत्र दिवस मनाता है. इसी दिन 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ और हमारा देश संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना. लेकिन क्या कभी सोचा है कि गणतंत्र दिवस के लिए 26 जनवरी की तारीख ही क्यों चुनी गई? इसका संबंध 1930 के ‘पूर्ण स्वराज’ संकल्प से है. गणतंत्र दिवस केवल परेड और झांकियों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की नींव और उन लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने का भी अवसर है.
इस बार 2026 में भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी दफ्तरों में तिरंगा फहराने के बाद अक्सर भाषण और क्विज प्रतियोगिताएं होती हैं. स्टूडेंट्स के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि हमारा संविधान, जो दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, उसे बनाने में कितनी मेहनत और शोध किया गया था. जानिए गणतंत्र दिवस और भारतीय संविधान से जुड़े 10 रोचक तथ्य, जिन्हें सुनकर आप भी कह उठेंगे- मेरा भारत महान!
गणतंत्र दिवस: 10 ऐतिहासिक और रोचक तथ्य
1. 26 जनवरी की तारीख का रहस्य
1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को ‘पूर्ण स्वराज’ घोषित किया था. इस ऐतिहासिक महत्व को बनाए रखने के लिए 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू करने के लिए चुना गया.
2. दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान
भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा हस्तलिखित संविधान है. इसमें मूल रूप से 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं. आज यह और भी विस्तृत हो चुका है.
3. न टाइपिंग, न प्रिंटिंग- सब हाथों का कमाल
क्या आप जानते हैं कि हमारा मूल संविधान टाइप या प्रिंट नहीं किया गया था? इसे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने इटैलिक शैली में अपने हाथों से लिखा था.
4. शांतिनिकेतन के कलाकारों की कलाकारी
संविधान के हर पन्ने को शांतिनिकेतन के कलाकारों ने सजाया है, जिसमें नंदलाल बोस और उनके शिष्यों का प्रमुख योगदान रहा है.
5. संविधान बनाने में लगा समय
इसे तैयार करने में कुल 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा. इस दौरान संविधान सभा ने कई देशों के संविधानों का बारीकी से अध्ययन किया.
6. उधार का थैला? नहीं, श्रेष्ठता का संगम!
भारतीय संविधान को अक्सर ‘उधार का थैला’ कहा जाता है क्योंकि इसके विभिन्न हिस्से अन्य देशों से प्रेरित हैं. जैसे- स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श फ्रांस से लिए गए हैं.
7. पहली परेड कहां हुई थी?
आज हम राजपथ (कर्तव्य पथ) पर भव्य परेड देखते हैं, लेकिन 1950 से 1954 के बीच परेड राजपथ पर नहीं, बल्कि इरविन स्टेडियम (अब नेशनल स्टेडियम), लाल किला और रामलीला मैदान में हुई थी.
8. राष्ट्रपति को दी जाने वाली सलामी
गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान जब राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं तो उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है. यह सलामी सैन्य सम्मान का सर्वोच्च प्रतीक है.
9. ‘अबाइड विद मी’ और ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’
बीटिंग रिट्रीट समारोह में पहले ‘अबाइड विद मी’ धुन बजाई जाती थी, लेकिन अब भारतीयता को बढ़ावा देने के लिए भारतीय धुनें और ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ जैसे गीत शामिल किए गए हैं.
10. मुख्य अतिथि की परंपरा
1950 में पहले गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि थे. तब से हर साल किसी न किसी राष्ट्र प्रमुख को बुलाने की परंपरा जारी है.

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