ईरान युद्ध के बाद से ही पीएनजी, सीएनजी, एलपीजी और एलएनजी बहुत चर्चा में हैं. इनकी किल्लत होने की खबरें आ रही हैं. देश में बहुत से होटल और इटरीज एलपीजी नहीं मिलने की वजह से बंद हो गई हैं. भारत के लिए ये बड़ी खबर है और इसका असर भी व्यापक है. साथ ही एलएनजी की कमी से भी कई कारखाने बंद होने की कगार पर आ गए हैं. आखिर ये सब हैं क्या. इनमें अंतर क्या होता है. क्या ये सारी चीजें बाहर से आती हैं जो इनकी किल्लत भारत को भारी पड़ रही है.
ये चारों ही गैसे हैं. इनका इस्तेमाल ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में होता है. इनके बगैर जिंदगी चलनी बहुत मुश्किल है. ये सभी हाइड्रोकार्बन हैं, लेकिन ये बात भी सही है कि ये सभी अलग हैं. इनके रूप और इस्तेमाल करने के तरीके भी अलग हैं. ये सभी भारत में अलग अलग देशों और तरीकों से आते हैं. एक बात और समझ लीजिए कि एलपीजी को अगर क्रूड ऑयल रिफाइन करके समय निकाला जाता है तो सीएनजी और पीएनजी का सबकुछ एलएनजी पर टिका रहता है. ये दोनों उसी से मिलते हैं.
एलपीजी यानि LPG
ये लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस कहते हैं. ये मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है. इसे भारी दबाव में तरल बनाकर सिलेंडरों में भरा जाता है. यह कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस के शुद्धिकरण से मिलती है. भारत के ज्यादातर घरों में खाना बनाने के लिए इन्हीं का इस्तेमाल होता है. एलपीजी पेट्रोलियम रिफाइनरी से निकलने वाली गैस है. इसे सिलेंडरों में बेचा जाता है. घरेलू रसोई यानि कुकिंग गैस के लिए ये सबसे आम है.
पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा लोग घरेलू ईंधन गैस के तौर पर एलपीजी का इस्तेमाल करते हैं. ये नेचुरल गैस द्रव अवस्था में सिलिंडर में होती है. (AI News18 Image)
मार्च 2026 तक भारत में सक्रिय एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 33 करोड़ है. जिसमें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 10.4 करोड़ लाभार्थी भी शामिल हैं. देश में रोज औसतन 55 लाख सिलिंडर रिफिल होते हैं. 2014 में 14.5 करोड़ उपभोक्ता थे, जो अब 33 करोड़ तक पहुंच चुके हैं.
सीएनजी यानि CNG
इसका मतलब है कंप्रेस्ड नेचुरल गैस . यह मीथेन है जिसे बहुत उच्च दबाव पर संकुचित किया जाता है. यह गैसीय अवस्था में ही रहती है. मुख्य रूप से ये वाहनों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल होती है, क्योंकि यह साफ और कम प्रदूषण वाली है
भारत में पीएनजी पाइप लाइन के जरिए घरों में पहुंचने वाला घरेलू ईंधन है. ये गैसीय अवस्था में मीथेन होती है. इसके कस्टमर भारत में बढ़ रहे हैं. (AI News18 Image)
पीएनजी यानि PNG
इसे पाइप्ड नेचुरल गैस कहते हैं. ये भी मीथेन ही है, लेकिन इसे पाइपलाइनों के माध्यम से सीधे घरों या उद्योगों तक पहुंचाया जाता है. ये हवा से हल्की होती है. यह खाना पकाने, हीटिंग और छोटे उद्योगों के लिए इस्तेमाल होती है.
भारत में घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस उपभोक्ताओं की संख्या मार्च 2026 तक लगभग 1.5 करोड़ घरों तक पहुंच चुकी है. यह सुविधा मुख्य रूप से महानगरों और बड़े शहरों तक सीमित है, जहां सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए गैस पहुंचाई जाती है.
इसके उपभोक्ता तेजी से बढ़ रहे हैं. सरकार 2032 तक 12.5 करोड़ घरों तक इसके विस्तार का लक्ष्य रखे हुए है. वर्तमान में पीएनजी की कोई व्यापक किल्लत नहीं है, हालांकि वैश्विक तनाव से गैस आपूर्ति पर नजर रखी जा रही है. ये LPG की तुलना में सुरक्षित और सुविधाजनक है लेकिन नेटवर्क विस्तार धीमा होने से इसकी पहुंच अभी सीमित ही है.
एलएनजी यानि LNG
इसका मतलब है लक्विफाइड नेचुरल गैस. जब प्राकृतिक गैस को -162°C तक ठंडा किया जाता है, तो वह तरल बन जाती है. इस रूप में गैस का आयतन 600 गुना कम हो जाता है, जिससे इसे जहाजों के जरिए लंबी दूरी तक भेजना आसान होता है. भारत में इसे जहाजों से आयात किया जाता है. फिर गैस में बदलकर पीएनजी या सीएनजी के लिए इस्तेमाल होता है.
क्यों हैं चर्चा में
हाल ही में ईरान युद्ध और खाड़ी पर इसके असर की वजह से ग्लोबल गैस सप्लाई बाधित हो रही है. भारत अपनी गैस जरूरत का लगभग 50% आयात पर निर्भर है, खासकर एलएनजी का 40% कतर से आता है. इससे एलएनजी की कीमतें बढ़ी हैं, लिहाजा इसकी वजह से सीएनजी/पीएनजी की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
वैसे सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्राथमिकता दी है – एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पीएनजी का 100% गैस आवंटन सुनिश्चित किया गया है। इससे रसोई गैस की कीमतें बढ़ने और कमी की आशंका है.
भारत में ये कहां से आती हैं
भारत में इन सभी गैसों की रोज की खपत 19.1 करोड़ मानक घन मीटर है, जिसमें आधा आयात से ही पूरा होता है. पीएनजी और सीएनजी मुख्य रूप से घरेलू प्राकृतिक गैस से मिल जाती है, इसका कुछ हिस्सा एलएनजी को री-गैसिफाई करके मिलता है. कई अलग अलग कंपनियां अलग अलग क्षेत्रों में इसका वितरण करती हैं.
एलपीजी अगर भारतीय रिफायनरीज से निकलती हैं तो 60 फीसदी इनका आयात मिडिल ईस्ट से होता है. एलपीजी का एक बड़ा हिस्सा अगर विदेश से आता है तो आधा हिस्सा कृष्णा-गोदावरी बेसिन, मुंबई हाई, असम और राजस्थान के तेल क्षेत्रों से निकाला जाता है. ये मुख्य रूप से सऊदी अरब और खाड़ी देशों से आयात की जाती है.
एलएनजी ज्यादातर आयात से ही आती है. इसका ज्यादा हिस्सा कतर से आता है, इसके अलावा अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और नाइजीरिया इसके प्रमुख स्रोत हैं. इन्हें विशाल टैंकर जहाजों के जरिए भारत के टर्मिनलों पर लाया जाता है.

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