LPG सिलेंडर नियमों में बड़े बदलाव: केंद्र सरकार के 5 फैसलों से आप पर कितना असर? डिटेल

1 hour ago

LPG cylinder new rules: हाल-फिलहाल भारत में रसोई गैस (LPG) को लेकर कई बड़े बदलाव हो रहे हैं. दुनियाभर में जो तनाव का माहौल है और गैस-तेल की सप्लाई पर जो असर पड़ रहा है, उसे देखते हुए केंद्र सरकार ने कुछ सख्त फैसले लिए हैं. इन नए नियमों का सीधा असर हम और आप जैसे आम लोगों पर पड़ेगा, खासकर जो लोग शहरों में रहते हैं या मिडिल क्लास परिवारों से आते हैं.

सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों और आयात पर निर्भरता को देखते हुए ऊर्जा संसाधनों का संतुलित उपयोग जरूरी हो गया है. इसी कारण LPG की कीमत, बुकिंग नियम और सप्लाई व्यवस्था में कई बदलाव लागू किए गए हैं.

रसोई गैस का सिलेंडर हुआ महंगा

केंद्र सरकार ने बीते 7 मार्च को घर में इस्तेमाल होने वाले LPG सिलेंडर के दाम करीब 7% तक बढ़ा दिए हैं. इस बढ़ोतरी के बाद, 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत अब लगभग 965 रुपये तक पहुंच गई है.

करीब एक साल बाद गैस के दाम इस तरह बढ़े हैं और इसने आम परिवारों के महीनेभर के बजट पर थोड़ा असर डालने का काम किया है. एक तो पहले से ही महंगाई है, ऊपर से रसोई गैस के महंगे होने से गरीब परिवारों का हिसाब-किताब बिगड़ सकता है. हालांकि उज्ज्वला लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी सीधे बैंक खाते में मिलती है, यानी उन्हें सिलेंडर करीब 550 रुपये में पड़ता है. पात्र श्रेणियों में SC/ST, PM आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थी, अति पिछड़ा वर्ग, अंत्योदय अन्न योजना (AAY), चाय बागान जनजातियां, वनवासी, द्वीपवासी, SECC परिवार और 14-सूत्री घोषणा के तहत गरीब परिवार शामिल हैं.

गैस बुकिंग का नया नियम: रिफिल गैप

सरकार ने गैस सिलेंडर बुक करने के तरीके में भी एक बड़ा बदलाव किया है. नए नियम के मुताबिक, अब आप एक सिलेंडर बुक करने के तुरंत बाद दूसरा बुक नहीं कर सकते. दोनों बुकिंग के बीच एक तय समय का गैप (अंतर) रखना जरूरी होगा.

पहले यह नियम था कि आप 25 दिनों के बाद ही दूसरा सिलेंडर ले सकते थे, लेकिन अब गांवों और कस्बों (ग्रामीण इलाकों) में इस गैप को बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने लोकसभा में कहा कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में यह गैप बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है, जबकि शहरी इलाकों में 25 दिन का नियम जारी है. तर्क यह है कि ग्रामीण उपभोक्ता आमतौर पर एक सिलेंडर ज़्यादा दिन चलाते हैं और वहां डायवर्जन का खतरा भी अधिक है. यदि आप इस नियम को लेकर परेशान हैं तो चिंता न करें, क्योंकि हमने यहां ऐसे ट्रिक बताएं हैं, जो आपके रोजाना गैस खर्च को लगभग 25 फीसदी कम कर सकते हैं.

इस नियम के साथ सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि बुकिंग के बाद डिलीवरी 2.5 दिन में होगी. एक परिवार साल में 15 सिलेंडर बुक कर सकता है, जिनमें से 12 सब्सिडाइज़्ड हैं. घर में कानूनी तौर पर अधिकतम 2 सिलेंडर रखे जा सकते हैं.

जिनके घर पाइप से गैस आती है, उनके लिए सख्त नियम

अगर आपके घर में पाइप वाली गैस यानी PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) का कनेक्शन है, तो नए नियमों के तहत अब आप अपने घर में LPG सिलेंडर नहीं रख सकते. इस पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.

सरकार ने गैस कंपनियों को साफ-साफ कह दिया है कि जिन लोगों के पास पहले से पाइप वाली गैस है, उन्हें न तो नया सिलेंडर का कनेक्शन दिया जाए और न ही पुराना सिलेंडर भरकर दिया जाए. ऐसे लोगों से कहा गया है कि वे अपनी मर्जी से अपना पुराना LPG कनेक्शन सरेंडर कर दें.

आखिर ये सब क्यों हो रहा है?

इसकी सबसे बड़ी वजह है ऊर्जा का संकट. आपको शायद पता हो कि भारत अपनी जरूरत की लगभग 90 प्रतिशत LPG गैस दूसरे देशों से खरीदता है. हाल ही में ईरान में जो लड़ाई और तनाव चल रहा है, उससे गैस का आयात मुश्किल हो गया है.

ईरान और इज़राइल के बीच लड़ाई की वजह से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ से गुजरने वाले जहाजों का आना-जाना प्रभावित हुआ है. इसी रास्ते से हमारे पास मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से गैस आती थी, जिसमें अब काफी कमी आ गई है.

हालांकि, सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है. इस परेशानी से निपटने के लिए दूसरे रास्ते खोजे जा रहे हैं. सरकार अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे देशों से गैस खरीदने की कोशिश कर रही है. इसके साथ ही, देश के अंदर मौजूद रिफाइनरियों (जहां गैस और तेल साफ होता है) में भी गैस का उत्पादन लगभग 28% तक बढ़ाने की तैयारी चल रही है.

आम लोगों की क्या है चिंता?

सरकार का कहना है कि ये सारे कदम इसलिए उठाए जा रहे हैं ताकि गैस सबको बराबर मिल सके. खासकर उन जगहों पर जहां पाइप वाली गैस (PNG) पहुंच चुकी है, वहां से LPG सिलेंडर कम करके उन्हें गांवों और गरीब परिवारों तक पहुंचाया जा सके.

लेकिन, इन सबके बीच आम लोगों के मन में एक बड़ा सवाल घूम रहा है. लोगों का सोचना है कि अगर कभी कोई इमरजेंसी आ गई और पाइप वाली गैस की सप्लाई बंद हो गई, तो उनके पास खाना पकाने का दूसरा क्या विकल्प होगा? फिलहाल, गैस एजेंसियां अपने ग्राहकों के डेटा पर नज़र रख रही हैं और सब कुछ नए नियमों के हिसाब से ही मैनेज किया जा रहा है.

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