DNA: पेंटागन में अचानक क्यों बढ़ी पिज्जा की डिमांड? ईरान जंग से क्या है बड़ा कनेक्शन

2 hours ago

US-Iran Conflict: अमेरिका की सैन्य तैयारी से ही ये संकेत नहीं मिल रहे हैं कि ईरान पर भीषण हमला होनेवाला है. तीन और बड़े संकेत हैं, जो ये बता रहे हैं, युद्ध शुरू होने ही वाला है. पहला संकेत ये है कि पेंटागन में पिज्जा की डिमांड बढ़ गई है. दूसरा संकेत ये है कि इजरायल के प्रधानमंत्री का विमान देश से बाहर चला गया है और तीसरा बड़ा संकेत ये है कि दुनिया में अनाज की स्टोरेज बढ़ गई है. इन संकेतों को क्यों ईरान पर हमले की भविष्यवाणी माना जा रहा है. सबसे पहले बात पेंटागन पिज्जा इंडेक्स थ्योरी की. पेंटागन पिज्जा इंडेक्स थ्योरी किसी देश के खिलाफ अमेरिका के युद्ध में शामिल होने की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भविष्यवाणी है. इस थ्योरी के मुताबिक जब अमेरिका के पेंटागन के आसपास पिज्जा के ऑर्डर अचानक बढ़ जाते हैं तो दुनिया में कहीं बड़ा हमला या सेना का एक्शन होता है. पेंटागन में पिज्जा की डिमांड इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि अधिकारी संकट के समय देर रात तक काम करते हैं. 14 जनवरी से पेंटागन पिज्जा इंडेक्स में तेज बढ़त हुई है. पिछले 24 घंटों में पेंटागन के आसपास के पिज्जा आउटलेट्स पर ऑर्डर में असामान्य उछाल देखा गया. 

पेंटागन पिज्जा इंडेक्स थ्योरी

डोमिनोज पिज्जा के ऑर्डर में करीब 1000% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि एक्सट्रीम पिज्जा और पापा जॉन्स में भी 200% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई. जून 2025 में जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था तब भी पिज्जा इंडेक्स तेजी से बढ़ा था. अब फिर पेंटागन पिज्जा इंडेक्स में तेज बढ़त दर्ज की गई है, हालांकि पेंटागन हमेशा ऐसी किसी भी थ्योरी से इनकार करता है. अक्टूबर 1983 में अमेरिका ने जब ग्रेनेडा पर हमला किया था तो उस हमले से एक रात पहले पेंटागन में पिज्जा के ऑर्डर दोगुने हो गए थे. दिसंबर 1989 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के समय जब पनामा पर हमला किया गया था तो हमले से एक दिन पहले पिज्जा की मांग अचानक बढ़ गई थी. 1 अगस्त 1990 की रात जब कुवैत पर इराक ने हमला किया था तो इराक के हमले से ठीक पहले एक ही रात में पेंटागन में काफी ऑर्डर किए गए थे. 13 अप्रैल 2024 को ईरान ने इजरायल पर 300 मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया था. इस हमले से ठीक पहले पेंटागन के आसपास पिज्जा की मांग एकाएक बढ़ गई थी  
शीत युद्ध के दौरान जब भी पेंटागन के आसपास पिज्जा की डिलीवरी बढ़ जाती तो सोवियत संघ के जासूसों को किसी बड़ी कार्रवाई की आशंका होती थी. उस समय सोवियत संघ के जासूस इसके लिए पिज्जिंट कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे.पिज्जिंट शब्द पिज्जा का ही छोटा रूप है. ईरान पर हमले का दूसरा अलग संकेत इजरायल से आया है। ये संकेत इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को लेकर है. 

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इजराइली एयर स्पेस से बाहर गया नेतन्याहू का विमान 

'द टाइम्स ऑफ इजरायल' के मुताबिक इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का सरकारी विमान 'विंग ऑफ जिओन' 14 जनवरी को इजराइली एयर स्पेस से बाहर चला गया. फ्लाइट ट्रैकिंग साइट्स के मुताबिक प्लेन भू मध्य सागर को पार कर आगे की ओर गया. यह कुछ समय ग्रीस में भी रुका था.  जब भी इजरायल या उसके आस-पास कोई भी हमला होने वाला होता है, नेतन्याहू का विमान इजरायल से बाहर किसी सुरक्षित जगह पर चला जाता है. 13 जून 2025 को जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, तब भी नेतन्याहू का विमान इजरायल से बाहर चला गया था. इसी तरह जब 13 अप्रैल 2024 को ईरान ने इजराइल पर ड्रोन अटैक किया था, तब भी यह विमान इजरायल से चला गया था. नेतन्याहू का सरकारी विमान जब इजरायल से बाहर गया तो कयास ये भी लगाए जा रहे थे कि उन्होंने भी देश छोड़ दिया है. हालांकि ताजा अपडेट ये है कि नेतन्याहू का विमान इजरायल लौट आया है, लेकिन एक और बड़ी बात यहां हम आपको बताना चाहते हैं. नेतन्याहू ने अगले हफ्ते की अपनी सारी बैठकें, पहले से तय सभी कार्यक्रम रद्द कर दिये हैं. ये युद्ध का ही संकेत है. 

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अनाज क्यों स्टरो कर रहे देश? 

दुनिया के तमाम देश अपना अनाज भंडार भर रहे हैं. पता है ऐसा कब होता है. ऐसा तब होता है जब किसी बड़े युद्ध की आशंका होती है. क्योंकि युद्ध के कारण सप्लाई चेन टूट जाती है. ईरान-अमेरिका तनाव के बीच स्वीडन ने 2026 में 63 मिलियन डॉलर सिर्फ फूड स्टॉक के लिए रखा है. चीन ने 18 अरब डॉलर से ज्यादा का स्टॉक बजट रखा है. नॉर्वे ने फिर से गेहूं का भंडार बनाना शुरू कर दिया है
जर्मनी डिब्बाबंद खाना जमा कर रहा है. फिनलैंड ने अनाज का रिजर्व 6 महीने से बढ़ाकर 9 महीने कर दिया है. मिस्र ने 60 लाख टन गेहूं जमा कर लिया है. ब्राज़ील ने सरकारी अनाज खरीद फिर शुरू कर दी है. इंडोनेशिया ने भी चावल का भंडार लगभग दोगुना कर लिया है. दुनिया का कोई एक देश अनाज का भंडार नहीं बढ़ा रहा है.  कई देश अनाज का भंडार बढ़ा रहे हैं. यानी ये देश मान रहे हैं कि बड़ी जंग होगी, सप्लाई चेन पर असर होगा और अनाज की सप्लाई बाधित होगी. इसे भी ईरान पर हमले का संकेत माना जा रहा है.

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