Last Updated:March 17, 2026, 13:03 IST
Nanda Devi LPG Ship: कतर से एलपीजी लेकर रवाना हुए भारतीय जहाज 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' सुरक्षित रूप से होर्मूज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंच गए हैं. इसके बाद एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इन जहाजों में आई एलपीजी से कितने घरेलू गैस सिलेंडर भरे जा सकते हैं? चलिये जानते हैं...

पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण भारत में एलपीजी की हुई किल्लत अब बड़ी राहत मिलने वाली है. कतर से एलपीजी लेकर रवाना हुए भारतीय जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ सुरक्षित रूप से होर्मूज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंच गए हैं. ‘शिवालिक’ जहां सोमवार को ही गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच चुका है, वहीं ‘नंदा देवी’ मंगलवार दोपहर कांडला पोर्ट पहुंच गया. इन दोनों जहाजों के सुरक्षित पहुंचने से ईंधन आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं के बीच बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
इससे पहले, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि दोनों भारतीय एलपीजी जहाज शिवालिक और नंदा देवी लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी भारत ला रहे हैं. ये दोनों जहाज सरकारी स्वामित्व वाली शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं. सिन्हा ने यह भी कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उनसे जुड़ी किसी भी अप्रिय घटना की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है.
कितने सिलेंडर भर सकती है इतनी LPG?
अब सबसे अहम सवाल इन जहाजों में आई एलपीजी से कितने घरेलू गैस सिलेंडर भरे जा सकते हैं? भारत में घरेलू उपयोग के लिए एक एलपीजी सिलेंडर में 14.2 किलोग्राम गैस भरी जाती है. अगर कुल 92,700 मीट्रिक टन (यानी 9,27,00,000 किलोग्राम) एलपीजी को सिलेंडरों में भरा जाए, तो इससे करीब लगभग 6.5 करोड़ (65 मिलियन) घरेलू एलपीजी सिलेंडर भरे जा सकते हैं. यह मात्रा देश के लाखों परिवारों की जरूरत को पूरा करने के लिए काफी बड़ी मानी जाती है और सप्लाई चेन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है.
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकता है.
हाल के दिनों में क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं. ऐसे में भारतीय जहाजों का सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार करना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
फारख की खाड़ी में फंसे कितने भारतीय जहाज
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फारस की खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 22 भारतीय जहाज मौजूद थे, जिनमें 611 नाविक सवार थे. सरकार लगातार इन जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर नजर बनाए हुए है.
इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात से करीब 81,000 टन कच्चा तेल लेकर आ रहा जहाज ‘जग लाडकी’ भी मुंद्रा बंदरगाह की ओर रवाना हो चुका है. इस जहाज और उसके चालक दल के सुरक्षित होने की भी पुष्टि की गई है.
मंत्रालय ने बताया है कि देश के सभी प्रमुख बंदरगाह जहाजों की आवाजाही और माल ढुलाई पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं. साथ ही शिपिंग कंपनियों और व्यापार से जुड़े हितधारकों को हर संभव सहायता दी जा रही है. इसमें लंगरगाह, किराया और भंडारण शुल्क में रियायतें भी शामिल हैं, ताकि आपूर्ति बाधित न हो.
‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे जहाजों का सुरक्षित भारत पहुंचना न सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी भारत अपनी सप्लाई चेन को बनाए रखने में सक्षम है. इन जहाजों से आई एलपीजी लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों सिलेंडरों की जरूरत पूरी कर सकती है, जो आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है.
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First Published :
March 17, 2026, 13:03 IST

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