0 सवाल, 1 बहस और 53% हाजिरी: राज्यसभा से रिटायर हुए पूर्व CJI रंजन गोगोई, सदन में क्यों रहे इतने खामोश?

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0 सवाल, 1 बहस और 53% हाजिरी: राज्यसभा से पूर्व CJI रंजन गोगोई की 'खामोश' विदाई

Last Updated:March 16, 2026, 21:14 IST

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का राज्यसभा में 6 साल का कार्यकाल समाप्त हो गया है. सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उनके कानूनी कौशल की सराहना करते हुए उन्हें विदाई दी. हालांकि, उनका कार्यकाल चर्चाओं में रहा; उन्होंने 6 वर्षों में मात्र 53% उपस्थिति दर्ज की केवल एक बहस (दिल्ली सेवा बिल) में हिस्सा लिया और एक भी सवाल नहीं पूछा. उन्होंने इसे न्यायपालिका और विधायिका के बीच समन्वय का जरिया बताया था.

 राज्यसभा से पूर्व CJI रंजन गोगोई की 'खामोश' विदाईZoom

रंजन गोगोई राज्‍यसभा से रिटायर हो गए हैं. (PTI)

नई दिल्ली: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई का राज्यसभा के मनोनीत सदस्य के रूप में 6 साल का कार्यकाल आज यानी 16 मार्च 2026 को समाप्त हो गया. सदन में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें विदाई संदेश देते हुए उनके कानूनी कौशल और विधायी प्रक्रिया की गहरी समझ की सराहना की. सभापति ने कहा कि सदन उनके तर्कपूर्ण हस्तक्षेप और गरिमा को याद रखेगा. हालांकि रंजन गोगोई का यह संसदीय सफर जितना चर्चित रहा, उतना ही विवादों और आंकड़ों के घेरे में भी रहा. उनके कार्यकाल से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

संसदीय कार्यकाल के प्रमुख प्‍वाइंट
·         कम उपस्थिति: डिजिटल संसद पोर्टल के अनुसार, 6 साल के कार्यकाल में उनकी कुल उपस्थिति मात्र 53% रही, जबकि सांसदों का औसत 80% होता है. कार्यकाल के शुरुआती वर्षों में तो यह आंकड़ा केवल 10% के करीब था.

·         सवाल और बिल: संसद के रिकॉर्ड बताते हैं कि अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने एक भी सवाल नहीं पूछा और न ही कोई प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया.

·         बहस में भागीदारी: उन्होंने 6 साल में केवल एक बार बहस में हिस्सा लिया. यह बहस राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 पर थी, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया था.

·         संसदीय समिति: वे अपने पूरे कार्यकाल के दौरान ‘कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय’ संबंधी संसदीय समिति के सदस्य रहे.

विवाद और स्पष्टीकरण
·         नियुक्ति पर सवाल: CJI पद से रिटायर होने के मात्र 6 महीने बाद राज्यसभा के लिए मनोनीत होने पर रंजन गोगोई की काफी आलोचना हुई थी. उन्होंने इसे न्यायपालिका और विधायिका के बीच एक “मिलन बिंदु” बताया था.

·         कम सक्रियता का कारण: कम बोलने पर उन्होंने तर्क दिया था कि सदन में होने वाले हंगामे के कारण वे सार्थक चर्चा नहीं कर पाते थे. साथ ही, उन्होंने कहा कि वे कोई “पेशेवर राजनेता” नहीं हैं जिन्हें करियर बनाने के लिए सवाल पूछने की जरूरत हो.

·         बुनियादी ढांचे पर टिप्पणी: दिल्ली सेवा बिल पर बहस के दौरान उन्होंने संविधान के ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure Doctrine) को “विवादास्पद न्यायशास्त्रीय आधार” वाला बताया था, जिस पर काफी कानूनी बहस छिड़ी थी.

सवाल-जवाब
रंजन गोगोई ने राज्यसभा में किस महत्वपूर्ण बिल पर बहस में हिस्सा लिया था?

उन्होंने दिल्ली सेवा विधेयक (GNCTD Amendment Bill, 2023) पर बहस में हिस्सा लिया था और केंद्र सरकार की शक्तियों का समर्थन किया था.

उनके संसदीय कार्यकाल के दौरान उपस्थिति का रिकॉर्ड क्या रहा?

रंजन गोगोई की कुल उपस्थिति 53% रही. शुरुआती वर्षों (2021 तक) में यह केवल 10% थी, जिसका कारण उन्होंने कोविड-19 और मेडिकल सलाह बताया था.

रंजन गोगोई के विदाई संदेश में सभापति ने क्या कहा?

सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें एक प्रतिष्ठित न्यायविद् बताया और कहा कि सदन उनकी कानूनी सूझबूझ और गरिमापूर्ण चर्चाओं को याद रखेगा.

Location :

Delhi,Delhi,Delhi

First Published :

March 16, 2026, 21:14 IST

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