नेपोलियन की दहशत से खाली हुआ पुर्तगाल का सिंहासन, ब्राजील के देश बनने की ऐतिहासिक तारीख

1 hour ago

Brazil History: ये घटना न सिर्फ नेपोलियन युद्धों के बीच सबसे नाटकीय मोड़ थी, बल्कि इसने उपनिवेश और साम्राज्य के बीच संबंधों की पारंपरिक समझ को भी बदल दिया था. क्योंकि, इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था, जब किसी यूरोपीय साम्राज्य की प्रभावी राजधानी एक उपनिवेश में बदल गई. उस वक्त नेपोलियन पूरी तेजी से पूरे यूरोप पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा था. इसके लिए नेपोलियन ने कॉन्टिनेंटल सिस्टम को भी लागू किया था. इसके अंतर्गत ब्रिटेन के साथ व्यापार करने वाले देशों पर वो दबाव बनाने के साथ-साथ सैन्य कार्रवाई  भी कर रहा था. 

नेपोलियन की लिस्बन पर चढ़ाई 
उस वक्त पुर्तगाल ने ऐतिहासिक तौर पर ब्रिटेन के साथ मजबूत सहयोग रखा था. जिसके चलते वो फ्रांस का अगला लक्ष्य बन गया था. लेकिन नेपोलियन जब अपनी सेना के साथ लिस्बन की ओर बढ़ा तो पुर्तगाल पर 'ब्रिगेंजा' वंश का राज करता था. अपने पिता की अनुपस्थिति में प्रिंस रीजेंट जाओ ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया. उसने ब्रिटिश नौसेना की सुरक्षा में पूरे शाही दरबार, अधिकारियों, सैनिकों और परिवारों को लेकर सैकड़ों किलोमीटर में फैले अटलांटिक को पार करने का फैसला किया. 

ब्राजील पहुंचे पुर्तगाली राजा
ब्राजील पहुंचने से पहले रियो डी जेनेरियो एक साधारण सा उपनिवेशी बंदरगाह था, जो बाद में अचानक से यूरोपीय साम्राज्य की कार्यकारी राजधानी बन गया था. जहां पर व्यापार, प्रशासन के अलावा शिक्षा और कूटनीति की नई संरचनाएं बनाई गई. इतना ही नहीं शाही आदेशों पर शहर में नई संस्थाएं खोली गईं, जिसमें राष्ट्रीय पुस्तकालय से लेकर बैंक ऑफ ब्राजील और उच्च शिक्षण संस्थान भी शामिल हैं. उन्होंने आगे चलकर दशकों के बाद ब्राजील की आधुनिक पहचान को आकार दिया. 

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पुर्तगाल बना देश

इस कदम की वजह से इतना गहरा असर हुआ कि दक्षिण अमेरिका पुर्तगाली साम्राज्य का केंद्र लगने लगा. हालांकि, यूरोप को छोड़ने का निर्णय तो अस्थायी था लेकिन इसका परिणाम बिल्कुल स्थायी साबित हुआ. शाही दरबार के  ब्राजील में आ जाने से यहां पर राजनीतिक चेतना को इतना मजबूत किया की अंततः 1822 में ब्राजील को स्वतंत्र साम्राज्य घोषित कर दिया गया. जिसके बाद वो वो आगे चलकर एक शक्तिशाली राष्ट्र-राज्य के तौर पर अपनी पहचान बनाई.

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