क्या रद्द होगा S-400 सौदा; पुतिन के दौरे से पहले भारत ने क्यों बदल दिए नियम?

1 hour ago

Last Updated:November 29, 2025, 08:09 IST

क्या रद्द होगा S-400 सौदा; पुतिन के दौरे से पहले भारत ने क्यों बदल दिए नियम?रूस में एक कार्यक्रम के दौरान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम. फोटो-रायटर

S-400 Air Defence News Update: ऑपरेशन सिंदूर के बाद की परिस्थितियों से निपटने के लिए भारत अपनी सुरक्षा तैयारियों में किसी प्रकार की कोई कोताही नहीं बरतना चाहता है. इस ऑपरेशन में बुरी तरह मात खाने के बाद पाकिस्तान कभी भी पलटवार कर सकता है. ऐसे में हमें पूरी तरह सचेत रहने की जरूरत है. दूसरी ओर चीन है, जो पाकिस्तान का जिगरी यार है. उस पर भारत कभी भरोसा नहीं कर सकता है. इसी कारण भारत अपनी रक्षा तैयारियों में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रखना चाहता है.

इस संदर्भ में एक बड़ा डेवलपमेंट हुआ है. भारत ने अपनी हथियार खरीद नीति में बड़ा बदलाव किया है. ये बदलाव ऐसे में समय में किए गए हैं जब अगले सप्ताह की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आ रहे हैं. रूस भारत का एक सबसे बड़ा रक्षा साझेदार है. भारत ने रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद की है. लेकिन, 2018 में हुए इस सौदे की पूरी डिलिवरी अभी तक पूरा नहीं हो पाई है. इस एस-400 ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को बेहद गहरा घाव दिया था जिसकी कराह वह आज तक नहीं भूल पाया है.

नीति में क्या है बदलाव

दरअसल, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने न्यूज एजेंसी एएनआई के एक कार्यक्रम में कहा कि इमर्जेंसी क्लॉज के तहत हथियारों की खरीद से जुड़े नियम में बड़ा बदलाव किया गया है. इसके तहत सौदे की तारीख से एक साल के भीतर अगर सप्लाई नहीं मिलती है तो सरकार उस डील को रद्द कर देगी. उन्होंने कहा कि इस नियम से आपूर्तिकर्ता कंपनी पर दबाव बनेगा कि वह समय पर अपना वादा पूरा करे.

एस-400 को लेकर क्या बता हुई

इसी कार्यक्रम के दौरान सिंह ने एस-400 डिफेंस सिस्टम को लेकर भी बड़ी बात कही. दरअसल, भारत ने 2018 में रूस के साथ एस-400 के पांच स्क्वाड्रन की डील की थी. लेकिन, रूस के यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझने के कारण इसकी अभी तक केवल तीन स्क्वाड्रन की ही सप्लाई हो पाई है. भारत रूस के साथ और पांच स्क्वाड्रन खरीदना चाहता है ताकि वह देश की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके. लेकिन, सप्लाई की यह दिक्कत बड़ी चिंता का विषय है. हालांकि यह डील इमर्जेंसी क्लॉज के तहत नहीं आता है. ऐसे में इस सौदे के रद्द होने की कोई संभावना नहीं है.

राजेश सिंह ने कहा कि पुतिन के भारत दौरे में इस मुद्दे को उठाया जाएगा. वह पांच दिसंबर को भारत आ रहे है. उनके दौरे में कई अहम समझौते हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि हम रूस से एस-400 की डिलिवरी पर स्पष्ट जवाब चाहते हैं.

क्यों पड़ी कड़े नियम की जरूरत?

उन्होंने आगे कहा कि हमने इमर्जेंसी हथियार खरीद सौदे को लेकर जो कड़ा फैसला लिया है उसके दायरे में सभी कंपनियां और सभी देश आएंगे. उन्होंने कहा कि अगर इमर्जेंसी कॉन्ट्रेक्ट किया गया हो तो कंपनियों या देशों को एक साल के भीतर सप्लाई करनी होगी वरना वह डील रद्द हो जाएगी. इंडियन एक्सप्रेस अखबार के मुताबिक सरकार को यह कड़ा फैसला इसलिए लेना पड़ा है क्योंकि चीन के साथ एलओसी पर तनातनी के दौरान कई हथियारों से जुड़े इमर्जेंसी कॉन्ट्रेक्ट किए गए लेकिन उनकी डिलिवरी आज तक नहीं हुई है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया था. उसने तीनों सेनाओं को यह मंजूरी दी है कि वे अपने बजट की 15 फीसदी राशि इमर्जेंसी में हथियारों की खरीद पर खर्च कर सकती हैं. हथियारों की डिलिवरी में देरी से जुड़े एक सवाल पर राजेश सिंह ने कहा कि इसके लिए केवल देसी कंपनियों को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. बल्कि आपने देखा है कि रूस के साथ एस-400 की डिलिवरी में भी काफी देरी हो रही है. इजरायल के साथ भी हथियार सौदों को पूरा करने में देरी हो रही है क्योंकि वह भी जंग में उलझा हुआ था. इसी तरह अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक यानी जीई के एफ404 इंजन की सप्लाई में भी दिक्कत आ रही है. यही इंजन भारत के देसी फाइटर जेट तेजस-एमके1ए में लगाए जाने हैं.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें

First Published :

November 29, 2025, 08:09 IST

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