Last Updated:November 29, 2025, 19:09 IST
Gautam Gambhir: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में क्रिकेट का जिक्र हुआ. जस्टिस एम.एम. सुंदरेश ने कहा कि T20 पर ध्यान दोगे तो टेस्ट हारोगे. इस पर मुकुल रोहतगी ने तुरंत टोका, "हेड कोच मेरे दोस्त हैं." उन्होंने खुलासा किया कि हार पर सुबह ही गौतम गंभीर से बात की और कहा, "अपनी पिचों पर हारो तो बेहतर है रुक जाओ."
सुप्रीम कोर्ट में साउथ अफ्रीका से टेस्ट हार का जिक्र हुआ. कानून की दुनिया में जब आया क्रिकेट का जिक्र, जज-वकील की दलीलों में उभरी टेस्ट क्रिकेट की फिक्र. सुप्रीम कोर्ट में चल रहे गंभीर कानूनी मामलों के बीच अचानक क्रिकेट का जिक्र हो गया. यह हल्का-फुल्का संवाद सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और जस्टिस एम.एम. सुंदरेश के बीच हुआ. इसका संदर्भ था हाल ही में साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम की 0-2 से करारी हार. बातचीत उस समय शुरू हुई जब रोहतगी एक मामले की लंबी सुनवाई का संदर्भ दे रहे थे. रोहतगी ने जिक्र किया कि जस्टिस सुंदरेश ने कभी टिप्पणी की थी कि वह फाइनल हियरिंग नहीं करते हैं, जिस पर जस्टिस सुंदरेश ने मजाकिया लहजे में कहा कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा.
‘टी20 पर अधिक ध्यान’
लेकिन माहौल तब और दिलचस्प हो गया जब जस्टिस सुंदरेश ने भारतीय क्रिकेट टीम के प्रदर्शन पर टिप्पणी की. उन्होंने कहा, “देखिए, अब आप भारतीय टीम का प्रदर्शन देखते हैं. जब आप टी20 पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं तो एक दिन आप टेस्ट मैच हार जाएंगे. यह टिप्पणी सीधे तौर पर भारत की टेस्ट क्रिकेट में हालिया गिरावट और टी20 फॉर्मेट को दिए जा रहे अत्यधिक महत्व पर एक कड़ा तंज था. जज साहब के इस क्रिकेटिंग गूगली पर सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी. रोहतगी ने उन्हें बीच में रोकते हुए कहा, “माय लॉर्ड मैं आपको बता दूं कि हेड कोच (गौतम गंभीर) मेरे दोस्त और मुवक्किल हैं.”
When a Supreme Court hearing turns into cricket analysis + family drama + Rohatgi’s elite storytelling.
Justice Sundaresh & Justice Satish Sharma had the whole courtroom smiling. ⚖️🏏
Only in India can law, sport and legacy blend this effortlessly.
‘अगर अपनी पिचों पर हारोगे तो…’
रोहतगी ने आगे बताया कि उन्होंने हार के संदर्भ में सुबह ही हेड कोच को फोन किया था. उन्होंने कोच को देश की भावना से अवगत कराते हुए कहा, “पूरा देश अब कह रहा है कि अगर आप अपनी पिचों पर भी इस तरह हारने जा रहे हैं, तो बेहतर है कि रुक जाएं.” यह संवाद न केवल न्याय के मंदिर में एक दुर्लभ और मनोरंजक पल था बल्कि यह उस व्यापक निराशा को भी दर्शाता है जो साउथ अफ्रीका में मिली करारी हार के बाद देश में फैली हुई है. जस्टिस सुंदरेश की टिप्पणी में छिपा संदेश स्पष्ट था: तात्कालिक सफलता (टी20) के पीछे भागने से खेल के मूल और सबसे प्रतिष्ठित प्रारूप (टेस्ट क्रिकेट) को नुकसान पहुंचता है. वहीं, रोहतगी का कोच से सीधे संवाद का दावा, बताता है कि क्रिकेट अब केवल खेल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और सार्वजनिक चिंता का विषय बन चुका है, जिसकी गूंज देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच रही है.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें
First Published :
November 29, 2025, 18:50 IST

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