क्या US से चांद पर जाएगा पहला भारतीय:मून मिशन के लिए NASA ने भारतीय मूल के अनिल मेनन को चुना, भारत में बिता चुके हैं एक साल

1 month ago

वॉशिंगटन5 मिनट पहले

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अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने अपने मून मिशन के लिए 10 ट्रेनी अंतरिक्ष यात्रियों को चुना है। इनमें भारतीय मूल के अनिल मेनन (45) भी शामिल है, जो NASA की क्लास 2021 का हिस्सा बनेंगे। NASA पिछले 50 साल में पहली बार चांद पर इंसान भेजने की योजना पर काम कर रहा है। अनिल अमेरिकी एयरफोर्स में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं और स्पेस एक्स में फ्लाइट सर्जन भी रहे।

अनिल मेनन भारत में भी करीब एक साल गुजार चुके हैं। तब वे यहां पोलियो अभियान की स्टडी और उसके सपोर्ट के लिए भेजे गए थे। चंद्रमा पर अभी तक भारत का कोई अंतरिक्ष यात्री नहीं गया है। भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा थे और ऐसा करने वाली भारतीय मूल की पहली महिला कल्पना चावला थीं। अगर अनिल NASA के मून मिशन का हिस्सा बनते हैं तो वे चंद्रमा पर जाने वाले पहले भारतीय मूल के व्यक्ति होंगे।

कौन हैं अनिल मेनन?
अनिल मेनन के माता-पिता भारतीय और यूक्रेनियन थे। वे अमेरिका के मिनेसोटा में पले-बढ़े हैं। उन्होंने 1999 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से न्यूरोबायोलॉजी में ग्रैजुएशन किया। 2004 में कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की। स्टैनफोर्ड मेडिकल स्कूल से उन्हें डॉक्टर की डिग्री भी मिली हुई है। उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर NASA के कई अभियानों के लिए क्रू फ्लाइट सर्जन का भी रोल निभाया है।

स्पेसएक्स के लिए किया काम

2014 में उन्होंने NASA के फ्लाइट सर्जन के तौर पर काम करना शुरू किया। वे सोयुज मिशन में भी शामिल रहे। 2018 में उन्होंने एलन मस्क की स्पेसएक्स जॉइन की। कंपनी की पहली ह्यूमन फ्लाइट के मेडिकल प्रोग्राम और तैयारियों में मदद की। उन्होंने स्टारशिप के निर्माण, एस्ट्रोनॉट प्रोग्राम, लॉन्च प्रोग्राम्स के लिए काम किया।

साल 2010 के हैती भूकंप, 2015 के नेपाल भूकंप और 2011 में हुए रेनो एयर शो हादसे के दौरान मेनन ने ही बतौर रिस्पांडर पहली प्रतिक्रिया दी थी।

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