ब्रिटेन के 70 स्कूलों में पढ़ाई जा रही मंदारिन:चीनी भाषा पढ़ाने वाले संस्थानों के जरिये ड्रैगन कर रहा घुसपैठ

1 month ago
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4 मिनट पहलेलेखक: लंदन से भास्कर के लिए एना-सोफिया सोलिस

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चीन अपनी भाषा मंदारिन के जरिये कई देशों के शिक्षा संस्थानों में घुसपैठ कर चुका है। ड्रैगन का ये दांव दुनिया भर में अपनी संस्कृति को बढ़ा कर प्रभावशाली बनना है। मंदारिन को विश्व में 112 करोड़ लोग बोलते हैं। मंदारिन को पहली भाषा (फर्स्ट लैंग्वेज) के तौर पर 83.1% लोग बोलते हैं। जबकि अंग्रेजी को सिर्फ 28.6% लोग पहली भाषा के तौर पर बोलते हैं। 2004 में मंदारिन सिखाने वाले कन्फ्यूशियस संस्थान 50 से अब 525 हो गए हैं।

यहां 90 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। 2005 में ब्रिटेन के 8% स्कूलों में मंदारिन पढ़ाई जाती थी। अब करीब 70 स्कूलों के 6,000 छात्रों को ये पढ़ाई जा रही है। इन संस्थानों के लिए चीन सरकार 80 हजार करोड़ का फंड देती है। ब्रिटिश पीएम पद के उम्मीदवार ऋषि सुनक ने ये मुद्दा उठाते हुए कहा था कि चीन ने ब्रिटेन की शिक्षा व्यवस्था में घुसपैठ है। यदि वे पीएम बने तो ब्रिटेन के सभी चीनी संस्थानों को बंद करवा देंगे।

ब्रिटेन की अलग-अलग यूनिवर्सिटी में मंदारिन सिखाने वाले 30 संस्थान हैं। जानकारों का कहना है कि चीन खुद को ‘सॉफ्ट पॉवर’ के रूप में बढ़ा रहा है। आधुनिक चीनी इतिहास और राजनीति के प्रो. राणा मित्तर ने बताया कि ब्रिटेन को राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार को समझने के लिए मंदारिन भाषियों की जरूरत है।

ब्रिटिश पीएम पद के उम्मीदवार ऋषि सुनक ने कहा था कि चीन ने ब्रिटेन की शिक्षा व्यवस्था में घुसपैठ है। यदि वे पीएम बने तो ब्रिटेन के सभी चीनी संस्थानों को बंद करवा देंगे।

ब्रिटिश पीएम पद के उम्मीदवार ऋषि सुनक ने कहा था कि चीन ने ब्रिटेन की शिक्षा व्यवस्था में घुसपैठ है। यदि वे पीएम बने तो ब्रिटेन के सभी चीनी संस्थानों को बंद करवा देंगे।

साल 2016 में ब्रिटिश सरकार ने अपने यहां के सभी माध्यमिक स्कूलों में मंदारिन एक्सीलेंस प्रोग्राम लांच किया था। इसका उद्देश्य था कि साल 2020 तक ब्रिटेन के बच्चे धाराप्रवाह मंदारिन बोल सकें। इसके लिए करीब 96 करोड़ रुपए खर्च किए गए। ब्रिटेन में कन्फ्यूशियस संस्थानों के आलोचकों का कहना है ये महज प्रचार का एक माध्यम हैं। ये ब्रिटेन के युवाओं की सोचने और बोलने की आजादी पर काबू पाना चाह रहे हैं।

नेपाल: कई स्कूलों में मंदारिन को सीखना अनिवार्य किया
नेपाल के कई स्कूल छात्रों को मंदारिन सीखना अनिवार्य कर चुके हैं। यह फैसला चीन सरकार के उस प्रस्ताव के बाद लिया गया, जिसमें मंदारिन के शिक्षकों का वेतन काठमांडू स्थित चीनी दूतावास के द्वारा दिए जाने की बात कही गई। हालांकि, नेपाल के करिकुलम डेवेलपमेंट सेंटर ने मंदारिन की अनिवार्यता का विरोध किया था। नेपाल में वन बेल्ट-वन रोड परियोजना के तहत ही चीन ने मंदारिन के दायरे को बढ़ाने की योजना को लागू किया है।

चीन ने नेपाल में केपी शर्मा ओली के शासन में जगह-जगह पर स्टडी सेंटर खोले, इनमें मंदारिन पढ़ाई जाती है। दावा है कि इन स्टडी सेंटर में नेपाली छात्रों पर चीनी संस्कृति को थोपा जा रहा है। ये सेंटर नेपाल के नागरिक चलाते हैं, लेकिन इनका खर्चा चीन उठा रहा है। काठमांडू यूनिवर्सिटी में 4 कन्फ्यूशियस कक्षाओं और 14 शिक्षण स्थलों में 20,000 से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं।

सीपीईसी के जरिये पाकिस्तान में मंदारिन की एंट्री हुई
पाकिस्तान में मंदारिन सीखने का ट्रेंड चीन-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) में निवेश के बाद बढ़ा है। इस्लामाबाद में चीनी भाषा के प्रो. मुराद शाह का कहना है कि बेरोजगारी ने यहां के लोगों को मंदारिन सीखने के लिए मजबूर किया है। लोगों को उम्मीद है कि मंदारिन सीखने पर उन्हें सीपीईसी में काम मिल जाएगा। पाक में 5 कन्फ्यूशियस संस्थान और दो कन्फ्यूशियस क्लासरूम हैं।

करीब 30,000 छात्र मंदारिन पढ़ रहे हैं। चीनी संस्कृति में विशेषज्ञ मोहम्मद शहजाद यूसुफ ने बताया कि सीपीईसी से पहले संस्थानों में मंदारिन सीखने वाले 200 से 300 छात्र थे, लेकिन अब हर संस्थान में 3000 हजार से अधिक छात्र हैं। पाकिस्तान में 700 से अधिक निजी संस्थान मंदारिन भाषा में डिप्लोमा का कोर्स चला रहे हैं। -इस्लामाबाद से भास्कर के लिए नासिर अब्बास

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