'दम लगा के हईशा' के 6 साल पूरे:फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिलने पर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर को नहीं हो रहा था यकीन, दोनों एक-दूसरे से पूछ रहे थे क्या सच में मिला है!

1 month ago

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मुंबई5 मिनट पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

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आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर स्टारर फिल्म 'दम लगा के हईशा' को शनिवार को 6 साल पूरे हो गए हैं। यह कल्ट क्लासिक फिल्म साल 2015 में 27 फरवरी को रिलीज हुई थी। छठी वर्षगांठ के मौके पर फिल्म के डायरेक्टर मनीष शर्मा और प्रोड्यूसर शरत कटारिया ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिलने पर दोनों को विश्वास ही नहीं हो रहा था। साथ ही दोनों ने उन दिनों को याद करते हुए फिल्म से जुड़ी कई बातें भी शेयर की।

फिल्में प्रोड्यूस करना कभी मेरे खयाल में ही नहीं था
यश राज फिल्म्स (YRF) के बैनर तले बनी इस फिल्म में मनीष ने बतौर प्रोड्यूसर उनके साथ जुड़ने की जर्नी के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, "फिल्में प्रोड्यूस करना कभी मेरे खयाल में ही नहीं था। लेकिन, आदित्य चोपड़ा ने ऐसा प्लान बनाया था, जिसकी मुझे भनक तक नहीं थी। 'शुद्ध देसी रोमांस' रिलीज होने के बाद 'फैन' फिल्म की तैयारी में लग गया था। एक दिन आदित्य से बात हुई, जिसका नतीजा यह निकला कि रातोंरात प्रोड्यूसर बन गया।

समझ नहीं आया, ऑडियंस को फिल्म की कौन-सी बात पसंद आई
फिल्म 'दम लगा के हईशा' को लिखते वक्त शरत कटारिया ऑडियंस से उम्मीदें और फिल्म की यूएसपी के सवाल पर कहते हैं- "लिखते वक्त आप ऐसी किसी भी चीज का खयाल दिमाग में नहीं लाते। आप अनिश्चितता के भंवर में डूबे होते हैं। हमेशा यही कोशिश करते हैं कि अपने सर्वश्रेष्ठ विचार लिख डालें। ऐसी कोई अपेक्षा नहीं थी। बता दूं कि लोगों की प्रतिक्रिया से अभिभूत था, पर ऐसे रिएक्शन की कभी उम्मीद नहीं की थी। फिल्म की यूएसपी क्या थी, मैं वाकई नहीं जानता। मुझे अभी तक यह समझ में नहीं आया कि ऑडियंस के दिल में इसकी कौन-सी चीज उतर गई।"

ऑडियंस का इतना प्यार मिलने के पीछे उनके टैलेंट का ही हाथ है
इस फिल्म से बॉलीवुड को एक नई और रोमांचक जोड़ी मिली, जो अब हिट फिल्में देते आ रही है। इस जोड़ी में क्या खासियत दिखी, जिस पर लोग अब तक प्यार बरसाते आ रहे हैं? इस सवाल पर शरत ने कहा, "इसमें उनके टैलेंट के सिवा और किसी चीज का हाथ नहीं है। दोनों का फिल्म के किरदार में पूरी तरह से उतर जाने की उनकी प्रतिभा का कमाल है। यकीन के साथ कह सकता हूं कि उनकी फिल्में और उनके परफॉर्मेंस कामयाब होने की यही वजह है। ऑडियंस का इतना प्यार पाने के पीछे उनके खुद के टैलेंट का ही हाथ है।

नेशनल अवॉर्ड जीतने पर मनीष और मुझे नहीं हो रहा था यकीन
फिल्म के नेशनल अवॉर्ड जीतने के पूरे वाक्य को बताते हुए शरत ने कहा, "मेरे पास इसकी बड़ी प्यारी यादें हैं। घोषणा होते वक्त मुझे इसके बारे में पता नहीं था। मेरे एक दोस्त ने इसको लेकर ट्वीट किया, तब मुझे पता चला कि अवॉर्ड मिला है। फिर तो मेरे मुंह से निकला- क्या सच में! मैं इसकी अपेक्षा नहीं कर रहा था। मुझे जानकारी भी नहीं थी कि अवॉर्ड घोषित हो चुके हैं, या फिल्म अवॉर्ड के लिए सबमिट की गई है। अवॉर्ड मिलने के बाद मेरी पहली प्रतिक्रिया कुछ ऐसी थी- ओ माय गॉड! अब पूरे दिन काम नहीं कर पाऊंगा।"

फिल्म को बेस्ट सिंगर और गीतकार की कैटेगरी में भी अवॉर्ड मिला था
शरत ने आगे कहा, "पहले तो यह खबर ही मन में नहीं बैठ पा रही थी, लेकिन जब फोन पर फोन आने लगे, तब यकीन हुआ। मुझे याद है, जब मैंने मनीष को फोन करके बताया कि फिल्म ने नेशनल अवॉर्ड जीत लिया है। फिल्म को न केवल हिंदी की बेस्ट फीचर फिल्म के लिए, बल्कि बेस्ट सिंगर (मोनाली) और सर्वश्रेष्ठ गीतकार (वरुण ग्रोवर) की कैटेगरी में भी अवॉर्ड मिला है। तब वे भी उतने ही आश्चर्यचकित हुए और बोले कि क्या बात कर रहे हो! उसके बाद तो इतने कॉल आने शुरू हो गए कि फोन की घंटी रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। इतने सारे फोन मेरी जिंदगी में कभी नहीं आए थे। यह वाकई जबर्दस्त अनुभव था।

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